चक्रीय अर्थव्यवस्था एवं रेखीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर एंड लिनियर इकोनामी)
दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में Take, Make, Use और Dispose की पद्धति का प्रचलन रहा है। इस पद्धति से तात्पर्य एक ऐसी व्यवस्था से है जिसमें सर्वप्रथम प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जाता है, उसके पश्चात संसाधनों का रूप एवं गुण परिवर्तन करके बाजार की मांग के अनुरूप वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। तत्पश्चात उत्पादित वस्तुओं को उपयोग हेतु उपभोक्ता तक पहुंचाया जाता है, उपभोक्ता वस्तुओं का उपयोग करने के पश्चात उन्हें या तो फेंक देता है या नष्ट कर देता है। यह एक रेखीय अर्थव्यवस्था (लीनियर इकॉनमी) का उदाहरण है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में वस्तुओं के उपभोग के पश्चात उनके पुनर्चक्रण की कोई व्यवस्था नहीं होती। इस व्यवस्था का सकारात्मक पक्ष यह है कि इसके अंतर्गत उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता उच्च होती है, साथ ही उत्पादन प्रारंभ करने हेतु सीमित निवेश की आवश्यकता होती है। यदि इस व्यवस्था का नकारात्मक पक्ष देखा जाए तो सर्वप्रथम प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन की बात आती हैं, क्योंकि उपभोग की गई वस्तुओं के पुनर...