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मौर्यकालीन स्थापत्य कला

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मौर्यकालीन कला   सारनाथ   स्तूप कला  की दृष्टि से  हड़प्पा की सभ्यता  और  मौर्यकाल  के बीच लगभग 1500 वर्ष का अंतराल है। इस बीच की कला के भौतिक  अवशेष  उपलब्ध नहीं है।  महाकाव...

गुप्त कालीन कला व संस्क्रति

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 देवनागरी  गुप्तकालीन कला और स्थापत्य   दशावतार विष्णु मन्दिर ,  देवगढ़ गुप्त काल में कला की विविध विधाओं जैसे वास्तु, स्थापत्य,  चित्रकला , मृदभांड, कला आदि में अभूतपूर्ण प्रगति देखने को मिलती है। गुप्तकालीन स्थापत्य कला के सर्वोच्च उदाहरण तत्कालीन मंदिर थे। मंदिर निर्माण कला का जन्म यहीं से हुआ। इस समय के मंदिर एक ऊँचे चबूतरें पर निर्मित किए जाते थे। चबूतरे पर चढ़ने के लिए चारों ओर से सीढ़ियों का निर्माण किया जाता था।  देवता  की मूर्ति को गर्भगृह (Sanctuary) में स्थापित किया गया था और गर्भगृह के चारों ओर ऊपर से आच्छादित प्रदक्षिणा मार्ग का निर्माण किया जाता था। गुप्तकालीन मंदिरों पर पार्श्वों पर गंगा, यमुना, शंख व पद्म की आकृतियां बनी होती थी। गुप्तकालीन मंदिरों की छतें प्रायः सपाट बनाई जाती थी पर शिखर युक्त मंदिरों के निर्माण के भी अवशेष मिले हैं। गुप्तकालीन मंदिर छोटी-छोटी ईटों एवं पत्थरों से बनाये जाते थे। ‘भीतरगांव का मंदिर‘ ईटों से ही निर्मित है। गुप्तकालीन महत्त्वपूर्ण मंदिर        मंदिर.       ...